Bekhayali

Unknown · 84 BPM · 4/4

Bekhayali

Unknown

0:000:00
Lyrics

बेख़याली में भी तेरा ही ख़याल आए

"क्यूँ बिछड़ना है ज़रूरी?" ये सवाल आए

तेरी nज़दीकियों की ख़ुशी बेहिसाब थी

हिस्से में फ़ासले भी तेरे बेमिसाल आए

मैं जो तुझसे दूर हूँ, क्यूँ दूर मैं रहूँ?

तेरा ग़ुरूर हूँ

आ, तू फ़ासला मिटा, तू ख़्वाब सा मिला

क्यूँ ख़्वाब तोड़ दूँ?

बेख़याली में भी तेरा ही ख़याल आए

"क्यूँ बिछड़ना है ज़रूरी?" ये सवाल आए

थोड़ा सा मैं ख़फ़ा हो गया अपने आप से

थोड़ा सा तुझपे भी बेवजह ही मलाल आए

है ये तड़पन, है ये उलझन

कैसे जी लूँ बिना तेरे?

मेरी अब सब से है अनबन

बनते क्यूँ ये ख़ुदा मेरे?

ये जो लोग-बाग हैं, जंगल की आग हैं

क्यूँ आग में जलूँ?

ये नाकाम प्यार में, खुश हैं ये हार में

इन जैसा क्यूँ बनूँ?

रातें देंगी बता, नीदों में तेरी ही बात है

भूलूँ कैसे तुझे? तू तो ख़यालों में साथ है

बेख़याली में भी तेरा ही ख़याल आए

"क्यूँ बिछड़ना है ज़रूरी?" ये सवाल आए

नज़रों आगे हर एक मंज़र रेत की तरह बिखर रहा है

दर्द तुम्हारा बदन में मेरे ज़हर की तरह उतर रहा है

नज़रों आगे हर एक मंज़र रेत की तरह बिखर रहा है

दर्द तुम्हारा बदन में मेरे ज़हर की तरह उतर रहा है

Tap any line to jump · 28 lyric lines synced

KeyG major
Tempo~84 BPM
Difficultyintermediate
Synced lines28