Zaroorat

Mustafa Zahid · 95 BPM · 4/4

Zaroorat

Mustafa Zahid

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Lyrics

ये दिल तन्हा क्यूं रहे

क्यूं हम टुकड़ों में जियें

ये दिल तन्हा क्यूं रहे

क्यूं हम टुकड़ों में जियें

क्यूं रूह मेरी ये सहे

मैं अधूरा जी रहा हूँ

हरदम ये कह रहा हूँ

मुझे तेरी ज़रुरत है

मुझे तेरी ज़रुरत है

मुझे तेरी ज़रुरत है

ये दिल तन्हा क्यूं रहे

क्यूं हम टुकड़ों में जियें

ये दिल तन्हा क्यूं रहे

क्यूं हम टुकड़ों में जियें

क्यूं रूह मेरी ये सहे

मैं अधूरा जी रहा हूँ

हरदम ये कह रहा हूँ

मुझे तेरी ज़रुरत है

मुझे तेरी ज़रुरत है

अंधेरों से था मेरा रिश्ता बड़ा

तूने ही उजालों से वाक़िफ़ किया

अब लौटा मैं हूँ इन अंधेरों में फिर

तो पाया है ख़ुद को बेगाना यहां

तन्हाई भी मुझसे ख़फ़ा हो गयी

बंजरों ने भी ठुकरा दिया

मैं अधूरा जी रहा हूँ

ख़ुद पर ही इक सज़ा हूँ

मुझे तेरी ज़रुरत है

मुझे तेरी ज़रुरत है

हम्म... तेरे जिस्म की, वो खुशबुएँ

अब भी इन साँसों में ज़िंदा हैं

मुझे हो रही इनसे घुटन

मेरे गले का ये फन्दा है

आां...

हो, तेरे चूड़ियों की वो खनक

यादों के कमरे में गूंजे हैं

सुनकर इसे आता है याद

हाथों में मेरे ज़ंजीरें हैं

तुही आके इनको निकल ज़रा

कर मुझे यहां से रिहा

मैं अधूरा जी रहा हूँ

ये सदायें दे रहा हूँ

मुझे तेरी ज़रुरत है

मुझे तेरी ज़रुरत है

मुझे तेरी ज़रुरत है

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KeyE major
Tempo~95 BPM
Difficultyintermediate
Synced lines45