Kabira
Unknown · Capo 3
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CapoPlace capo at fret 3; pitch is unchanged.
C
Lyrics
Cगुरु-गोबिंFद दो खड़Cे, काके लागDmो पाय?
गEmुरु-गCोबिंद दो खAmड़े, काके लGागो पायC?
Cबलिहारी गुरुG, आपने गEmोबिंद Fदियो बताय
CकबीरAmा, गCोबिGंद दFियो बAmताय
Fबड़ा हुआ तो Cmक्या हुआAm जैसे पेCmड़ खजूर?
Cmबड़ाC हFुआ तो Gक्या हुआ जैसे पेड़ खजूरAm?
Amपंथी को छायFा नहीं, फल Amलागे अति दूरF
FकबीDmरा,G फल लाCगेG अतAmि दूर
Cmऐसी GबाEmनी Fबोलिए Amमन का आपCा खोय
CऐसीF बानी Gबोलिए मन काDm आपा खGोय
Gऔरन को सीतFल करे, आपहGुँ सीतल होय
DmकबAmीGरा,Cm आFपहुGँ FसDmीतलG होयC
CबुराF जो देखन Gमैं चलाAm, बDmुरा ना मिGलिया कोय
GबुरFा जो देखन मGैं चला, बुरAmा ना मिलियाBm कोय
जGो मन खोजा आपना, मुझFसे बुरा ना कAmोय, कबीरा
FमुझसCेBm FबुराCm नाAm FकोGय
Gमाटी कहे कुम्हार से,Am "तू क्या रौंFदे मोय?"
FमाAmटी कहे कुFम्हार से, "तूG क्या रौंदे मोय?"
Gएक दिन Fऐसा आएगा, मैंCm रौंदूँगFी तोय, कबीरा
FमCmैंF रौंदCmूFँगी CmतोFय"
Fकाल करेC सो आFज कर, आज करेCm सो अब
Cmकाल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में परलय होएगी, बहुरी करेगा कब, कबीरा?
बहुरी करेगा कब?
माया मरी, ना मन मरा, मर-मर गए शरीर
माया मरी, ना मन मरा, मर-मर गए शरीर
आस्था-तृष्णा ना मरी कह गए दास कबीर
रे बंधु, कह गए दास कबीर
पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया ना कोय
पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया ना कोय
ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय, कबीरा
पढ़े सो पंडित होय
दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करे ना कोय
दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करे ना कोय
जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे होय, कबीरा?
तो दुख काहे होय?
मेरा मुझमें कुछ नहीं, जो कुछ है, सो तेरा
मेरा मुझमें कुछ नहीं, जो कुछ है, सो तेरा
तेरा तुझको सौंपते क्या लागे है मेरा, कबीरा?
क्या लागे है मेरा?
जाति ना पूछो साधु की, पूछ लीजियो ज्ञान
जाति ना पूछो साधु की, पूछ लीजियो ज्ञान
मोल करो तलवार का, पड़ी रहन दो म्यान
कबीरा, पड़ी रहन दो म्यान
निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय
निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय
बिन पानी, साबुन बिन, निर्मल करे सुहाय
कबीरा, निर्मल करे सुहाय
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All Chords Used
KeyG# major
CapoFret 3
Tempo~120 BPM
Difficultyintermediate
Synced lines48